The Moving Palace Is The Presidential Train.

The Moving Palace Is The Presidential Train.

चलता-फिरता राजमहल है प्रेसिडेंशियल ट्रेन, देखिए इस पैलेस ऑन व्हील की अंदर की तस्वीरें

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) अपने पैतृक आवास कानपुर प्रेसिडेंशियल (Presidential Train) यानि महाराजा एक्सप्रेस से पहुंच चुके हैं। देश के राष्ट्रपति ने ट्रेन से सफर किया है, तो जाहिर है ये ट्रेन भी बेहद खास होगी। ये ट्रेन एक चलता-फिरता शाही महल से कम नहीं है। इस ट्रेन में आम लोगों का सफर करना मुश्किल है, क्योंकि ट्रेन की टिकट की कीमत ही लाखों में होती है। बता दें कि राष्ट्रपति जिस ट्रेन में यात्रा करते हैं उसे प्रेसीडेंशियल सैलून भी कहते हैं जिसमें सिर्फ वही सफर कर सकते हैं। तो चलिए आपको इस महाराजा एक्सप्रेस के अंदर की कुछ तस्वीरों के साथ इसकी खासियत बताएं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रेसिडेंशियल ट्रेन से कानपुर के बाद यूपी की राजधानी लखनऊ पहुंचे हैं। योगी सरकार के मंत्री सतीश महाना भी प्रेजिडेंशियल ट्रेन में बैठे थे और उन्होंने ट्रेन की अंदर की तस्वीरे शेयर की हैं।

प्रेजिडेंशियल ट्रेन में 23 कोच हैं और इन कोचों में करीब 43 शाही केबिन बनाए गए हैं। ट्रेन में बुलेट प्रूफ विंडो, पब्लिक एड्रेस सिस्टम के साथ ही सेटेलाइट बेस्ट कम्युनिकेशन सिस्टम और कई आधुनिक टेक्नॉलीजी से लैस है। ट्रेन में अलग से एक कोच केवल प्रेसीडेंशियल सुइट के लिए रखा गया है।

ट्रेन में खाना परोसने के लिए सोने और चांदी के वर्क वाली प्लेट और गिलासों का यूज होता है। महाराजा एक्सप्रेस में बने 2 रेस्टोरेंट मोर महल और रंग महल बेहद खास हैं। कुछ कोच बिना छत वाले हैं, जो खुले आसमान का अहसास कराते हैं। इसमें बने सुइट के अंदर बने लिविंग रूम को मकराना मार्बल से तैयार किया गया है।

ट्रेन का टिकट 2 लाख से 16 लाख रुपए के बीच दी जाने वाली सुविधाओं के अनुसार रखा गया है। ट्रेन अंदर से एक शाही महल सा नजर आती है। इसमें डाइनिंग रूम, विजिटिंग रूम, लांज रूम, कांफ्रेंस रूम यात्री के हिसाब से बनाए गए हैं।

इस प्रेसीडेंशियल ट्रेन में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1950 में इस ट्रेन में पहली बार सफर किया था। इसके बाद डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डा. नीलम संजीवा रेड्डी ने इसमें सफर किया। फिर 1977 में डा. नीलम संजीवा रेड्डी ने यात्रा की।

इसके 26 साल बाद 30 मई 2003 को डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने इस सैलून से बिहार की यात्रा की थी। अब 18 साल बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसी से अपने जन्म आवास कानपुर पहुचे हुए हैं।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के प्रेसिडेंशियल ट्रेन के हर कोच पर अशोक स्तंभ बना हुआ है।

प्रेसीडेंशियल सैलून में सबसे पहला सफर विक्टोरिया ऑफ इंडिया ने इस्तेमाल किया था। पहले इसे वाइस रीगल कोच के नाम से जाना जाता था। ट्रेन में कोच का नंबर 9000 और 9001 लग्जीरियल कोच हैं, जो दिखने में एक जैसे हैं।

Also Read

Here The Gas Cylinder Being Given Instead Of Cow Dung.

Also Read

The Elephant Taught A Lesson To The Lioness In This Way.

Also Read

The Groom's Swayamvar Composed In Kali Yuga, 'Shiva Dhanush'.

Anmolk9155

Hi friends मेरे website पर आपका स्वागत है, मेरे वेबसाइट पर motivational quiets, earning tips, and अन्य सभी रोचक ब्लॉग पोस्ट डाले जाते हैं। इससे ज्यादा category wise देखने के लिए आप पोस्ट के ऊपर जाकर मीनू पर क्लिक करके देख सकते हैं ।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *