Tata And ITC Are Bringing Super Apps, What Are These Super Apps.


टाटा और ITC ला रहे हैं सुपर ऐप्स, क्या होते हैं ये सुपर ऐप्स? हमारी जिंदगी को कैसे बना रहे हैं आसान?

आपके स्मार्टफोन में कितने ऐप्स हैं? 10, 25 या 50? निश्चित तौर पर हर एक का अपना खास काम है और इसी वजह से वे आपके मोबाइल में बने हुए हैं। कैसा हो, अगर एक ही ऐप आपके सारे काम करने लगे? कंज्यूमर्स की इसी इच्छा को पूरा करने के लिए दुनिया के कई देशों में सुपर ऐप्स लॉन्च हुए हैं या हो रहे हैं।

भारत में भी सुपर ऐप पर काम चल रहा है। दो महीने पहले खबरें आई थीं कि नमक से लेकर सॉफ्टवेयर बनाने वाला टाटा ग्रुप एक ऑल-इन-वन सुपर ऐप बना रहा है। ITC ने पिछले हफ्ते एनुअल जनरल मीटिंग में किसानों के लिए एक ऐसा ही सुपर ऐप बनाने की घोषणा की है।

आइए समझते हैं कि यह क्या है? यह मौजूदा ऐप्स से कितना अलग होगा? इसमें किस तरह के काम हो जाएंगे?

यह सुपर ऐप्स क्या हैं?

ब्लैकबेरी फाउंडर माइक लैजारिडिस ने 2010 में सुपर ऐप शब्द दिया था। इसके बाद भी जो सुपर ऐप्स सामने आए उनमें कोई भी अमेरिका, यूरोप या UK से नहीं है। सुपर ऐप, यानी एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिस पर सभी जरूरत की वस्तुएं और सेवाएं मिलती हैं।

चीन में एक ऐसा ही ऐप है वीचैट (WeChat)। शुरुआत तो इसकी मैसेजिंग ऐप के तौर पर हुई थी। इसके बाद इस पर पेमेंट्स, शॉपिंग, फूड ऑर्डरिंग, कैब सर्विसेस भी मिलने लगी और इस तरह यह एक सुपर ऐप बन गया। आप सुपर ऐप की कल्पना एक मॉल के तौर पर भी कर सकते हैं, जहां रिटेल स्पेस में आपको सभी ब्रांड्स और बिजनेस व वर्टिकल्स की दुकानें मिल जाएंगी।

सुपर ऐप्स कौन बनाता है?

आम तौर पर ऐसी कंपनियां सुपर ऐप बनाती हैं, जो कई तरह की सर्विसेस और प्रोडक्ट्स ऑफर करती हैं। वे सुपर ऐप के जरिए इन ऑफरिंग्स को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश करती हैं।

सुपर ऐप का कंसेप्ट सबसे पहले चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया में सामने आया। वीचैट, गोजेक (GoJek), ग्रैब (Grab) ने अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए अतिरिक्त सर्विसेस देना शुरू किया। इन कंपनियों ने सोशल मीडिया और कम्युनिकेशन जरूरतों के आधार पर अपने प्लेटफॉर्म पर कस्टमर ट्रैफिक बढ़ाने के लिए ये कदम उठाए थे।

हालांकि, पश्चिम एशिया क्षेत्र में एक अलग ही अप्रोच सामने आई। माजिद अल फुत्ताइम ग्रुप, एमार, चलहूब ग्रुप जैसे पारंपरिक बिजनेस ग्रुप्स के शॉपिंग मॉल्स, ग्रॉसरी और एंटरटेनमेंट बिजनेस थे। उन्होंने डिजिटल असेट्स बनाए और उन्हें सुपर ऐप्स में बदल दिया। एक से अधिक प्रोडक्ट्स अब इस पर उपलब्ध हैं।

इंटरनेट कंसल्टेंसी फर्म रेडसीयर (RedSeer) के मुताबिक इन बिजनेस ग्रुप्स के डिजिटल असेट्स पर कस्टमर फुटफॉल बढ़ा और बार-बार खरीदने वाले कस्टमर्स की संख्या भी बढ़ी। यही किसी भी क्षेत्र में सुपर ऐप के फलने-फूलने का आधार बना। टाटा की अपने कंज्यूमर ऑफरिंग्स को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की योजना गल्फ रीजन के बिजनेस ग्रुप्स से मेल खाती है।

भारत में कौन-सी कंपनियां बना रही हैं सुपर ऐप्स?

भारत में जियो, पेटीएम, फोनपे जैसे कई ऐप्स सुपर ऐप्स बन चुके हैं। यह एक से अधिक सुविधाएं और प्रोडक्ट्स दे रहे हैं। जियो का प्लान तो अपने प्लेटफॉर्म पर 100 से अधिक प्रोडक्ट्स और सर्विसेस देने का है। इसके लिए उसने फेसबुक और गूगल से इन्वेस्टमेंट भी हासिल किया है। भारत में टाटा ग्रुप और ITC सुपर ऐप इकोसिस्टम में शामिल होने वाली नई कंपनियां हैं।

जियोः इससे पहले रिलायंस इंडस्ट्री ने जियो के तहत शॉपिंग, कंटेंट स्ट्रीमिंग, ग्रॉसरी, पेमेंट्स, क्लाउड स्टोरेज सर्विसेस, टिकट बुकिंग्स जैसी अपनी अलग-अलग ऑफरिंग्स को एक प्लेटफॉर्म पर पेश किया।

पेटीएमः अलीबाबा ग्रुप से फंडिंग पाने वाले और IPO की तैयारी कर रहे पेटीएम का प्लेटफॉर्म भी पीछे नहीं है। पेमेंट्स से शुरू होकर अब यह सुपर ऐप आपको टिकट बुकिंग, गेम्स, ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग, कंज्यूमर फाइनेंस के साथ-साथ इन्वेस्टमेंट ऑप्शन भी देता है।

फोनपेः इसी तरह फ्लिपकार्ट ग्रुप का पेमेंट्स ऐप फोनपे भी ओला कैब्स, स्विगी, ग्रॉफर्स, अजियो, डैकेथलॉन, दिल्ली मेट्रो, बुकिंग डॉट कॉम (booking.com) जैसी सेवाओं को अपने ऐप पर पेश कर रहा है।

SBI YONO: भारतीय स्टेट बैंक का प्लान अपने 2017 में लॉन्च किए गए डिजिटल ऐप YONO (यू ओन्ली नीड वन) को सुपर ऐप बनाने का है। इस पर पहले सिर्फ बैंकिंग सर्विसेस ऑफर हो रही थीं, पर अब ग्रुप कंपनियों की अन्य सर्विसेस को जोड़कर इसे फाइनेंशियल सुपरस्टोर बनाने की तैयारी है।

टाटा ग्रुपः टाटा ग्रुप अपने सुपर ऐप पर ग्रुप के अलग-अलग प्रोडक्ट्स और सर्विसेस को लाने की तैयारी में है। अगले महीने इसका पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू होने वाला है। इसके लिए टाटा डिजिटल नाम से कंपनी बनाई गई है, जो कंज्यूमर-फेसिंग बिजनेसेस को साथ में लाएगी।

ITC: देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में से एक ITC ने बुधवार को कहा कि वह अपना सुपर ऐप ITC MAARS लॉन्च करने वाली है। MAARS यानी मेटा मार्केट फॉर एडवांस्ड एग्रीकल्चर एंड रूरल सर्विसेस। यह किसानों को रेवेन्यू बढ़ाने के साथ-साथ ITC के वर्ल्ड क्लास ब्रांड्स को ड्राइव करेगी।

भारतीय कंपनियां सुपर ऐप्स क्यों बनाना चाहती हैं?

एक देश या क्षेत्र को तब सुपर ऐप के लिए तैयार माना जाता है, जब वहां की बड़ी आबादी डेस्कटॉप के बजाय स्मार्टफोन से ज्यादा से ज्यादा सेवाएं और सुविधाएं चाहती है। स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐप्स का इकोसिस्टम न होना भी इसकी एक बड़ी वजह है।

भारत एक ऐसा मार्केट बनता जा रहा है, जहां बड़ी आबादी इंटरनेट का इस्तेमाल कर रही है। आज 90% सब्सक्राइबर मोबाइल के जरिए इंटरनेट सर्फिंग कर रहे हैं। इस वजह से ज्यादातर कंपनियां सुपर ऐप्स बना रही हैं। इसके अलावा सुपर ऐप्स रेवेन्यू बढ़ाने के साथ ही कंज्यूमर डेटा से यूजर बिहेवियर के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने में कामयाब होता है।

क्या सुपर ऐप्स कंज्यूमर्स को सेफ सॉल्यूशन देते हैं?

नहीं। सबसे बड़ा खतरा होता है मोनॉपली का। जब ज्यादातर सर्विसेस एक ही प्लेटफॉर्म से मिलने लगें और उससे बड़ी संख्या में कंज्यूमर जुड़ जाते हैं तो उस कंपनी का मार्केट पर एकाधिकार हो जाता है। इसके अलावा प्राइवेसी का मुद्दा भी बहुत अहम हो जाता है, क्योंकि सुपर ऐप्स आम तौर पर थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ मिलकर काम करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मास्टर ऐप से कलेक्ट किया गया डेटा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मशीनों को कंज्यूमर बिहेवियर को ज्यादा बेहतर ढंग से समझने और उसका सटीक अनुमान लगाने में मदद करता है। यही एक वजह है कि US और UK में सुपर ऐप्स को बहुत रफ्तार नहीं मिल सकी है।

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