100 Crore Dream Fulfilled In One Year.

कार में तेल खत्म होने पर दिमाग में आया बिजनेस आइडिया और एक साल में पूरा किया 100 करोड़ का सपना

जीवन में हर किसी की चाहत होती है कि वह इतना पैसा कमाए कि उसे और उसके परिवार को कभी कोई समस्या न हो। जिंदगी भर लोग इसी जद्दोजहद में लगे रहते हैं। कुछ लोग अपने आप से समझौता कर थोड़ी सी कमाई में ही अपना जीवन गुजार लेते हैं। लेकिन, कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो कुछ बड़ा करने के लिए हमेशा कुछ न कुछ नया करने का प्रयास करते हैं और एक दिन वह अपने सपने को पूरा कर ही लेते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है, नोएडा के रहने वाले तीन दोस्त संदीप, टिकेंद्र और प्रतीक की। इन तीनों ने स्टार्ट अप (Start Up) के जरिये न केवल छोटी सी नौकरी को छोड़कर करोड़पति बनने का सपना पूरा किया है, बल्कि आज ये लोगों के लिए एक मिसाल बन चुके हैं।

नोएडा के संदीप, टिकेन्द्र और प्रतीक आज किसी के लिए नया नाम नहीं हैं। फर्श से अर्श तक पहुंचने वाले युवाओं को अधिकतर लोग उनके काम से जानते हैं। दरअसल, ये तीनों दोस्त 2014 तक अलग-अलग निजी कंपनियों में नौकरी किया करते थे। प्रतीक जहां एक्सिकॉम में नौकरी करते थे, वहीं संदीप और टिकेंद्र नोएडा स्थित सैमसंग कंपनी में जॉब करते थे। लेकिन, एक बिजनेस आइडिया (Business Idea) ने न केवल इनके सपने को पूरा किया, बल्कि इनकी जिंदगी बदल कर रख दी। इनकी इस स्टार्ट अप (Start Up) कंपनी आज 100 करोड़ से अधिक का सालाना टर्नओवर देती है।

ऐसे आया आइडिया

संदीप, टिकेंद्र और प्रतीक तीनों खाटी दोस्त हैं। उन्होंने बताया कि नौकरी के दौरान एक बार उन्होंने घूमने का प्लान बनाया था। लेकिन, ऐसी जगह जाकर उनकी कार बंद हो गई, जहां दूर-दूर तक कोई मददगार नहीं था। उनकी कार में पेट्रोल खत्म हो चुका था। वह धक्का मारकर कार खीचते रहे, लेकिन 10 किलोमीटर तक भी कहीं पेट्रोल पंप नहीं मिला। बस इसी एक घटना ने उनका जीवन बदल कर रख दिया। इसी परेशानी को उन्होंने अवसर बनाते हुए तीनों ने ऑनलाइन डीजल बेचने का प्लान तैयार किया। अपनी इसी याेजना को साकार करते हुए तीनों ने 2015 में स्टार्ट अप (Start Up) पेपफ्यूलडॉटकॉम (Pepfuel.Com) नाम से कंपनी खोली।

2016 तक पेट्रोल की डिलवरी पर था प्रतिबंध

बताया जा रहा है कि पेपफ्यूल डॉट कॉम कंपनी को सरकार से मान्यता मिली हुुई है। कंपनी का आईओसी के साथ थर्ड पार्टी करार हो रखा है। इस सर्विस के तहत कंपनी डोर-टू-डोर तेल की डिलीवरी करती है। ऑनलाइन या मैसेज के थ्रू आने वाले आर्डर को डिलीवरी बॉयज पहुंचाते हैं। हालांकि तेल की न्यूनतम मात्रा तय है, उससे कम डिलीवर नहीं किया जाता है। टिकेन्द्र ने बताया कि कंपनी शुरू करने के लिए उन्होंने सबसे पहले करीब 100 लोगों का फीडबैक लिया था, जिसमें अधिकतर लोगों पेट्रोल-डीजल के ऑनलाइन ऐप पर सहमति जताई थी। उन्होंने बताया कि 2016 तक देश में पेट्रोल की ऑनलाइन डिलीवरी पर प्रतिबंध था। पिछले साल ही सरकार ने इसकी इजाजत दी है।

आईओसी के अप्रूवल पर शुरू हुई कंपनी

वहीं, संदीप ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने अपने बिजनेस आइडिया को देश की तेल कंपनियों से साझा किया था और अपने स्टार्टअप का बिजनेस आइडिया पीएमओ को भी भेजा था। इसके कुछ समय बाद ही हमारे पास पीएमओ और आईओसी की ओर जवाब आया। उन्होंने बिजनेस की प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी। वहां से अप्रूवल मिलते ही हमने कंपनी शुरू कर दी। अब उनकी कंपनी 100 कराेड़ रुपए से भी अधिक का टर्नओवर दे रही है।

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